Login
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi adipiscing gravdio, sit amet suscipit risus ultrices eu. Fusce viverra neque at purus laoreet consequa. Vivamus vulputate posuere nisl quis consequat.
Create an accountLost your password? Please enter your username and email address. You will receive a link to create a new password via email.
यदि रोगी पेनिसिलिन-à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है, तो उसका इलाज किसी अनà¥à¤¯ à¤à¤‚टीबायोटिक से किया जा सकता है। यदि रोगी à¤à¤• वरà¥à¤· से कम समय तक पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ रहता है तो पेनिसिलिन की à¤à¤• खà¥à¤°à¤¾à¤• रोग की पà¥à¤°à¤—ति को रोक सकती है। यदि रोगी à¤à¤• वरà¥à¤· से अधिक समय से सिफलिस से पीड़ित है, तो उसे अतिरिकà¥à¤¤ खà¥à¤°à¤¾à¤• लेने की आवशà¥à¤¯à¤•ता हो सकती है।
सिफलिस(उपदंश) के लिठउपचार कà¥à¤¯à¤¾ हैं-
शीघà¥à¤° निदान के बाद सिफलिस को शीघà¥à¤° ही ठीक किया जा सकता है। पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ में à¤à¤‚टी-माइकà¥à¤°à¥‹à¤¬à¤¿à¤¯à¤² पेनिसिलिन के साथ इलाज किया जाता है जिसमें जीवों को मारने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ होती है जो सिफलिस का कारण बनते हैं। यदि रोगी पेनिसिलिन-à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है, तो उसका इलाज किसी अनà¥à¤¯ à¤à¤‚टीबायोटिक से किया जा सकता है। यदि रोगी à¤à¤• वरà¥à¤· से कम समय तक पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ रहता है तो पेनिसिलिन की à¤à¤• खà¥à¤°à¤¾à¤• रोग की पà¥à¤°à¤—ति को रोक सकती है।
यदि रोगी à¤à¤• वरà¥à¤· से अधिक समय से सिफलिस से पीड़ित है, तो उसे अतिरिकà¥à¤¤ खà¥à¤°à¤¾à¤• लेने की आवशà¥à¤¯à¤•ता हो सकती है। यदि सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को अनà¥à¤ªà¤šà¤¾à¤°à¤¿à¤¤ छोड़ दिया जाता है, तो यह लिवर, हृदय, मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• और तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा तंतà¥à¤° को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चा सकती है। सिफलिस से अंधापन और लकवा à¤à¥€ हो सकता है। यह à¤à¤šà¤†à¤ˆà¤µà¥€ फैलाने का अवसर बनाता है। यह घातक है जब à¤à¥€ अनà¥à¤ªà¤šà¤¾à¤°à¤¿à¤¤ छोड़ दिया जाता है।
सिफलिस(उपदंश) के घरेलू उपचार कà¥à¤¯à¤¾ हैं-
चाय के पेड़ का तेल(टी टà¥à¤°à¥€ ऑयल): यह à¤à¤• जीवाणà¥à¤°à¥‹à¤§à¥€ और सूजनरोधी à¤à¤œà¥‡à¤‚ट है और चाय के पेड़ के तेल का सामयिक उपयोग सिफलिस से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ दरà¥à¤¦ को कम करता है। बादाम के तेल या पानी के साथ तेल को पतला करें और सरà¥à¤µà¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤® परिणाम देखने के लिठइसे संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ जगह पर लगाà¤à¤‚।
दही: कम पà¥à¤°à¤¸à¤‚सà¥à¤•ृत खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ के साथ पूरक आहार लेना जारी रखें और पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ को बढ़ावा देने और सूजन को कम करने के लिठबहà¥à¤¤ सारे ताजे खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का उपयोग करें। परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ पानी पीने से विषाकà¥à¤¤ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को बाहर निकाला जा सकता है। पà¥à¤°à¥‹à¤¬à¤¾à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤•à¥à¤¸ के लैकà¥à¤Ÿà¥‹à¤¬à¥ˆà¤¸à¤¿à¤²à¤¸ उपà¤à¥‡à¤¦ अचà¥à¤›à¥‡ बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ हैं जो पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ को बढ़ावा देते हैं। यह फंगल, यीसà¥à¤Ÿ और यूटीआई इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से बचाता है।
à¤à¤²à¥‹à¤µà¥‡à¤°à¤¾: यह जीवाणà¥à¤°à¥‹à¤§à¥€ और सूजनरोधी जड़ी बूटी तà¥à¤µà¤šà¤¾ को हाइडà¥à¤°à¥‡à¤Ÿ करने और घावों को à¤à¤°à¤¨à¥‡ में मदद करती है। यह पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ को à¤à¥€ बढ़ाता है और यह सलाह दी जाती है कि सामयिक अनà¥à¤ªà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— के लिठजैल और पेय के लिठरस दोनों का सेवन करें। à¤à¤²à¥‹à¤µà¥‡à¤°à¤¾ घावों और निशान छोटो के इलाज में काफी हद तक मदद करता है।
कà¥à¤¯à¤¾ सिफलिस(उपदंश) 100% इलाज योगà¥à¤¯ है-
सिफलिस को उचित और परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ उपचार से आसानी से ठीक किया जा सकता है। यदि इसे अनà¥à¤ªà¤šà¤¾à¤°à¤¿à¤¤ छोड़ दिया जाता है, तो यह गंà¤à¥€à¤° जटिलताà¤à¤‚ पैदा कर सकता है। उपचार योजना में डॉकà¥à¤Ÿà¤° के साथ उचित परामरà¥à¤¶ के तहत पसंदीदा à¤à¤‚टीबायोटिक दवाओं का आवेदन शामिल है। संकà¥à¤°à¤®à¤£ का पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ ढंग से इलाज करने के लिठà¤à¤‚टीबायोटिक का कोरà¥à¤¸ पूरा किया जाना चाहिà¤à¥¤
| --------------------------- | --------------------------- |